Tuesday, November 2, 2010

बिहारी जी.पी.एस सेवा





विज्ञान की अनगिनत सुविधाओं में से एक है जी.पी.एस., जहाँ जाना हो वहां का पता उसमे डालिए, सैटेलाईट की मदद से जी.पी.एस आपको मार्ग-दर्शन करवाएगा. ऐसी सेवा भारत के बड़े राज्यों में शुरू कर दी गयी है, लेकिन मैं सोच रही थी की यही सेवा अगर बिहार में बिहार के ही अनूठे अंदाज़ में शुरू की जायेगी तो कैसा रहेगा? हमें किस किस तरह मार्ग दर्शन करवाएगा?

जी.पी.एस ऑन करते ही कुछ आवाज़ आएगी - "कहाँ जाना है जी? आएँ?? चिरइयांटाड? आच्छा"

-"सीधे ले लीजिये, तनी सा दाहिने...हाँ हाँ ...ई का महाराज...बाएं कीजिये. चलिए ... एकदम बूझईबे नहीं करता है आपको ता". थोडा आगे जाने के बाद, "अब एकरा बाद ता हमको बूझईबे नहीं कर रहा है....एक काम कीजिये ना...गडिया रोक के कौनो से पूछ लीजिये, हर बार अईजे आकर कनफुजिया जाते हैं"
किसी तरह आप अपने गंतव्य पर पहुंचे, वहां से फिर कहीं और जाने की इच्छा हुई, जी पी एस में पता डाला, डालते ही झुंझलाते हुए जवाब मिला "का जी...दिन भर टनडेली बुझाता है आपको ?, माने नहीं सुधरीएगा?"

अब सड़क पर गड्ढे तो होंगे ही, गाडी गड्ढे में जाते ही आवाज आई "का जी? आँख है की आलू का फांक? देखाई नहीं देता है का? ई ट्रकवा वाला सब ना एकदम ओमपुरी का गाल बना के रख दिया है रोड को, सच कह रहे हैं कौनो दिन ऊ सब हमको यूज किया ना...तब देखिएगा, ससुर के नाती को नहीं पहुंचा दिए झंझारपुर के बदले भालेसरगंज न, तब कहियेगा "
आपने जी पी एस के हाँथ जोड़े और आगे का रास्ता बताने का अनुरोध किया....."अब सोझे लीजिये, आss...दूर्र मरदे....स्पीड्वा बढाईये न, का आप भी एकदम सूकसुका के चला रहे हैं. कल्हे पिन्टुआ ले गईस था, ओकर गरल फेरेण्ड के घरे, फुलटुस गंज तरफ. एतना कचरा, धूल फांके की खोंखते खोंखते दू ठो सर्किट ख़राब हो गया. आ पिछलका हफ्ता राम परवेस के बेटी के गौना वाले गाडी में ले गया था नरकटियागंज सब फिट करके , भर रास्ता सब हमरा बगल में रखल हनुमान जी के फोटो के सामने इतना अगरबत्ती आ धुंआ जलाया सब की लगा की ससुरा सब सर्किटवे स्वाहा हो जायेगा"

आप अपनी यात्रा पूरी करके घर पहुँचने ही वाले थे की सोचा साईड में रुक कर तरकारी खरीद ली जाए, लेकिन तभी आवाज आई "ढेर तिडिंग-भिडिंग मत बतियाईये, चुप चाप से घरे चलिए आ मेरा बैटरिया जो भुकभुका रहा है, ओकरा चारज में लगाईये"

"जा झाड के बचवा!!!"

19 comments:

  1. हा हा हा हा ! का रे बबुनी ? इहाँ भी "आँख है की आलू का फांक?" अभी तक तो पीडिया की आँख ही आलू का फांक थी. मजेदार पोस्ट है.

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  2. हा हा ...हाँ दी...प्रशांत का तो आँख आलू का फांक हईये है :D

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  3. एक तो बात राकेट जईसन कपाड के उप्पर से सन्न दनी निकल गया कि ई लैकियन सब हमनी की काहे घसीट रही है जी?

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  4. काहे की तुम्हारा आँख नहीं है, आलू का फांक है! हा हा हा

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  5. chirayiyaan-tand..! :-) yeh post padh ke ek dum Patna chahup gaye!

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  6. प्रशांत..तुम्हारे साथ हम हैं...घबराना नहीं दोस्त.ई सब से डर लगे तो कोनो रोड पकड़ लेना जोर से... :)

    ई लड़की तो सुबह सुबह मिजाज एकदम टाईट कर दी है....इसको कहते हैं "कातिलाना पोस्ट" :)

    "ई ट्रकवा वाला सब ना एकदम ओमपुरी का गाल बना के रख दिया है रोड को,"

    हा हा हा ...रुको अभी बताते हैं ओम पूरी को.....घोर इन्सल्ट ओमपुरी के गाल का ..हा हा :)

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  7. हा हा हा ! तूं त जी पि यसवा के ही रस्ता बता दिहलू बच्ची ... बहुते गजब !

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  8. का बिटिया येही सब करने के लिए बीमार पड़ी हो का ? या फिर यह कहे कि खाली दिमाग में शैतानी सूझ रहा है ! वैसे बढ़िया लिखी हो .... मज़ा आ गया पढ़ कर !

    आपको और आपके परिवार में सभी को धनतेरस और दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ! !

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  9. बहुत बढ़िया जीपीएस वो भी खालिस देसी भाषा के तड़के के साथ मजा आ गया ।

    दीपावली की शुभकामनाएँ।

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  10. lekin yaar ab bihar badal gaya hai.road to kisi famous heroine ke gaal sa chikna ho gaya hai.vaise andaj-e-byan ka jawab nahi.dhanyawad.

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  11. एक दम टुन्न होके लिखी हो ...ई अमरीका बला सब सुने हैं कि , कफ़सिरप में का तो छोटा पैग मिला के देता है रे ..अब बुझा रहा है कि खबर पक्की है ..

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  12. जीपीएस मे अब विकास करना पड़ेगा, गड्ढों को भी डाल कर। तब कहीं जाकर गाड़ी को पता चलेगा कि सड़क के कोने में चलना है कि बीच में।

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  13. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपको और आपके परिवार में सभी को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ! !

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  14. “नन्हें दीपों की माला से स्वर्ण रश्मियों का विस्तार -
    बिना भेद के स्वर्ण रश्मियां आया बांटन ये त्यौहार !
    निश्छल निर्मल पावन मन ,में भाव जगाती दीपशिखाएं ,
    बिना भेद अरु राग-द्वेष के सबके मन करती उजियार !! “

    हैप्पी दीवाली-सुकुमार गीतकार राकेश खण्डेलवाल

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  15. nice and wish u a happy diwali and happy new year

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  16. हा हा हा ...लाजवाब...
    एकदम मन परसन्न हो गया...जियो !!!

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