Wednesday, September 1, 2021

सुबह की चाय, सनराईज़ और तुम

सुबह की चाय, सनराईज़ और तुम 

पता है तीनो में कॉमन क्या है? 

तीनो बस पालक झपकते गुलाबी शाम की तरह सरक जाते हैं 

पलाश के फूलों से रंगे आसमान को को ठीक से निहार लूँ, फिर उस हलकी दरकी हुयी सफ़ेद कप से चाय की चुस्की को गले के नीचे उतार कर तुम्हे कह सकूं "थोड़ी देर और नहीं रुक सकते?"

तुम कुछ वैसे जैसे मलमल के पत्तों पर पानी की बूंदों का सँभलने से पहले ही ढलक जाना 
बुगनबेलिए के फूलों की तरह, अनमने ढंग से लिपट जाना आवारा सा

ऑटम के लाल पीले पत्ते की तरह एक छठा बिखेर कर पतझड़ में बदल जाना 

डेन्डिलायन की फाहों की तरह कहीं उड़ जाना और मैं छोटे बच्चों की तरह दोनों हाँथ हवा में ऊपर करके तुम्हे पकड़ने के लिए तुम्हारे पीछे भागती हुयी सी .. 

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