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दो दिन पहले मैंने घर पे तुलसी जी का पौधा लगाया! बहुत दिन से इच्छा थी, लेकिन कोलोराडो के क्रूर जलवायु के कारन लगाने से डरती थी!
देखिये... आज तो प्रसन्न दिख रही हैं!
तुलसी जी के पौधे से बचपन से एक लगाव सा रहा है! नानी का घर बहुत बड़ा था, बड़ा सा आँगन और आँगन के एक कोने में एक चबूतरे पे नानी ने तुलसी जी का पौधा लगाया था और उनकी जड़ों के पास एक शिवलिंग की स्थपाना की थी जिसकी वो नियम से पूजा करती थीं! और नानी हमेशा तुलसी पौधे की विशेषता बताती थी! तुलसी जी का विवाह भी बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता था.
अरे वाह.. :)
ReplyDeleteतुम अपने ब्लाग को किसी ब्लाग अग्रीगेटर से जोड लो तो लोगो को तुम्हारे ब्लाग तक पहुचने मे आसानी रहेगी..
शेक्सपियर का कथन जो आपके आत्मकथ्य के
ReplyDeleteरूप में लगा है..कुछ भी अच्छा या बुरा...? मन से
सब है . पर फ़िर भी प्रश्न ये तो है कि फ़िर सच क्या
है अगर आप जो हो रहा है उसको सहने को विवश
हैं तो फ़िर ये कितना अजीब है फ़िर ये अच्छा या
बुरा साधारण स्थिति में कहा जा सकता है वरना
परेशानी होने पर हाय हाय करता है कुछ भी
अच्छा बुरा न लगे और परस्थितियों पर आपका
नियन्त्रण हो फ़िर बात अलग है वैसे आपने ब्लाग का
जो टेम्पलेट चुना है वही सेम मेरा है लेकिन मुझे
पता है तुलसी आदि के वारे में...आपके संस्कार
ही है . वरना सच्चाई बहुत अलग है . मैं आपको
सजेस्ट करूँगा कि आप "अनुराग सागर " कबीर
धर्मदास अवश्य पङें ये बुक आपको या किसी को
भी बदल सकती है..शेष शुभकामनायें
Nice Blog......!!!!keep it on.....!!!!
ReplyDeletehttp://idharudharki1bat.blogspot.com
गूगल बज़ में तो देख ही चुके हैं. :)
ReplyDeleteहार्दिक शुभकामनाएं
ReplyDeletebahut sundar
ReplyDeletehardik shubh kamnayen
nahee jog nahee jap
ReplyDeletenahee punya nahee pap
nahee jog nahee jap
ReplyDeletenahee punya nahee pap
wahhh bahut sundar....likhte raho hindi jagat main swagat hai!!
ReplyDeleteJai Ho Mangalmay HO
very good ur most welcome in our blog group
ReplyDeleteblog ki dunia me swagat hai aapka ...... shubhkamnaye
ReplyDeleteगुड...स्वागत है लेखन में
ReplyDeleteबज़ में देखा था तुलसी जी को।
ReplyDeleteसुखद है हमेशा नारायण के प्रत्येक भक्त, चिह्न, प्रतीक से मिलन, दर्शन, संग सभी कुछ।
मेरी नानी भी मुझे सुनाती थी बचपन में तुलसी के पौधे की विशेषता और महत्ता बताती थी...आज भी जब नानी के साथ फुरसत के झनो में बैठता हूँ तो बहुत कुछ ऐसी बात नानी से सीखने को मिलता है
ReplyDeleteअब तो बड़ा हो गया होगा पौधा...नई फोटू टांको!!
ReplyDeleteउड़न तश्तरी जी के बातों पर गौर किया जाए :)
ReplyDeleteसमीरलाल की बात नहीं मानी अभी तक? क्या हो गया है तुमको जी?
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